मुख्यमंत्री डॉ. यादव बोले – भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं लघु उद्योग, देश हित में मिलकर करेंगे काम

मुख्यमंत्री डॉ. यादव बोले – भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं लघु उद्योग, देश हित में मिलकर करेंगे काम

प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि उद्योगों के हित में ही राष्ट्र का हित निहित है। लघु और कुटीर उद्योग भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। सीमित संसाधनों का समुचित उपयोग कर हम इन उद्योगों के विकास की ओर बढ़ रहे हैं। स्वतंत्रता के अमृत काल में लघु उद्योग भारती के प्रदेश कार्यालय का लोकार्पण हमारे उत्कर्ष को दर्शाता है।

सीएम बोले – संतुलित विकास पर है जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि उद्योगों के विकास के लिए पूरे देश के परिदृश्य में सोचने की जरूरत है। सभी जगह समान रूप से उद्योग लगाने होंगे, तभी संतुलित विकास संभव है। उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार उद्योगपतियों के साथ कदम से कदम मिलाकर चलेगी और समाज के सभी वर्गों का बराबर ध्यान रखा जाएगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को गोविंदपुरा औद्योगिक प्रक्षेत्र में लघु उद्योग भारती के नवनिर्मित प्रदेश कार्यालय ‘उद्यम सेतु’ का वैदिक मंत्रोच्चार के बीच लोकार्पण कर रहे थे। करीब 4 करोड़ रुपए की लागत से बने इस भवन के लोकार्पण अवसर पर द्विवार्षिक प्रादेशिक सम्मेलन और स्टार्टअप एवं लघु उद्यमी महाकुंभ–2025 का भी आयोजन हुआ। इस मौके पर लघु उद्योग भारती का नया ब्रोशर भी जारी किया गया।

लोन और मॉर्टगेज से मिलेगी राहत

मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि किसी भी प्रकार का संस्थागत या बैंक लोन चुकता होते ही संबंधित बंधक संपत्ति स्वतः मॉर्टगेज से मुक्त हो जाएगी। इस प्रावधान का लाभ सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को भी मिलेगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में लघु उद्योगों की स्थापना और उनसे जुड़ी कठिनाइयों का समाधान समयबद्ध कार्ययोजना के अनुसार किया जाएगा।

रोजगार आधारित उद्योगों को मिलेगा प्रोत्साहन

प्रदेश में रोजगार आधारित उद्योग लगाने वाले उद्योगपतियों को विशेष प्रोत्साहन मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि नया आईटीआई, पॉलिटेक्निक और इंजीनियरिंग कॉलेज खोलने के लिए नीति अनुसार सब्सिडी दी जाएगी। साथ ही, रिसर्च वर्क को बढ़ावा देने के लिए आईआईटी इंदौर सहित अन्य संस्थानों के साथ स्टडी सेंटर खोलने पर विचार हो रहा है।

एमएसएमई का महत्व

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विरासत से विकास का सबसे सटीक उदाहरण भारतीय लघु उद्योग हैं। यह केवल कारोबार नहीं, बल्कि करोड़ों परिवारों की आशा और आत्म-सम्मान का आधार हैं। आज भारत में 6 करोड़ से अधिक एमएसएमई हैं, जो देश की जीडीपी में 30 प्रतिशत और निर्यात में 45 प्रतिशत योगदान देते हैं। भारत की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने में इनकी बड़ी भूमिका है।

आत्मनिर्भर भारत और वोकल फॉर लोकल

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का “मेक इन इंडिया” और “वोकल फॉर लोकल” का आह्वान बताता है कि आत्मनिर्भर भारत का मार्ग छोटे उद्योगों से ही निकलता है। एमएसएमई मेहनतकश हाथों को बड़े बाज़ारों से जोड़ने वाला पुल है।

तकनीक और मातृशक्ति की भूमिका

मुख्यमंत्री ने लघु उद्योगपतियों से आह्वान किया कि वे “दाम कम, दम ज्यादा” मंत्र अपनाकर विश्वसनीयता बढ़ाएं। तकनीकी और मार्केटिंग से जुड़ें, ई-कॉमर्स वेबसाइटों से अपने उत्पादों को लोकल से ग्लोबल बनाएं। उन्होंने कहा कि छोटे उद्योगों के केंद्र में मातृशक्ति है। लाड़ली बहनों की भागीदारी से न सिर्फ परिवार की आमदनी बढ़ती है बल्कि सामाजिक सशक्तिकरण का मार्ग भी खुलता है।

2047 के भारत में लघु उद्योगों की अहम भूमिका

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब 2047 में भारत विकसित और आत्मनिर्भर बनेगा, तब उसमें लघु उद्योगों की भूमिका सबसे बड़ी होगी।